वैदिक ज्योतिष शास्त्र में पंचांग का अत्यंत विशेष महत्व है। किसी भी शुभ या मांगलिक कार्य को आरंभ करने से पूर्व पंचांग के माध्यम से तिथि, वार, नक्षत्र, योग और करण की सटीक स्थिति का आंकलन किया जाता है। 6 जून 2026, दिन शनिवार को अधिक ज्येष्ठ मास के कृष्ण पक्ष की षष्ठी तिथि है। आज का दिन ज्योतिषीय दृष्टिकोण से बेहद संवेदनशील है, क्योंकि आज से ही ‘मृत्यु पंचक’ का आरंभ हो रहा है।
नीचे 6 जून 2026 के पंचांग की विस्तृत और संपूर्ण जानकारी दी गई है, जिससे आप अपने दिन की योजना सही प्रकार से बना सकते हैं:
पंचांग के मुख्य पांच अंग
आज के पंचांग के पांच मुख्य तत्व इस प्रकार हैं:
- तिथि: कृष्ण पक्ष षष्ठी तिथि (रात 02:40 बजे तक रहेगी, तत्पश्चात सप्तमी तिथि लग जाएगी)
- वार: शनिवार
- नक्षत्र: श्रवण नक्षत्र (सुबह 06:03 बजे तक, तत्पश्चात धनिष्ठा नक्षत्र आरंभ होगा)
- योग: इंद्र योग (सुबह 10:05 बजे तक, तत्पश्चात वैधृति योग लगेगा)
- करण: गरज (दोपहर 02:04 बजे तक, तत्पश्चात वणिज करण आरंभ होगा)
सूर्य और चंद्रमा की स्थिति
ग्रहों की चाल और दिशा हमारे दैनिक जीवन पर गहरा प्रभाव डालती है। आज के दिन सूर्य और चंद्रमा की स्थिति निम्नलिखित रहेगी:
| विवरण | समय / स्थिति |
| सूर्योदय | सुबह 05:24 बजे |
| सूर्यास्त | शाम 07:15 बजे |
| सूर्य की राशि | वृषभ राशि |
| चंद्रोदय | रात 09:20 बजे |
| चन्द्रास्त | सुबह 08:30 बजे (अगले दिन) |
| चंद्रमा की राशि | सायं 07:03 बजे तक मकर राशि में, तत्पश्चात कुंभ राशि में प्रवेश |
आज के शुभ मुहूर्त और योग
किसी भी नए कार्य, व्यापार या निवेश की शुरुआत के लिए शुभ मुहूर्त का ध्यान रखना अनिवार्य होता है। आज के दिन बनने वाले शुभ मुहूर्त इस प्रकार हैं:
- अभिजीत मुहूर्त: सुबह 11:52 बजे से दोपहर 12:48 बजे तक (यह समय सभी प्रकार के शुभ कार्यों के लिए अत्यंत श्रेष्ठ माना गया है)
- ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 03:44 बजे से 04:26 बजे तक
- सर्वार्थ सिद्धि योग: पूरे दिन रहेगा (इस विशेष योग में किए गए सभी कार्य पूर्ण रूप से सफल होते हैं)
- अन्य शुभ योग: आज रवि योग और द्विपुष्कर योग का भी विशेष संयोग बन रहा है।
- सुबह का चौघड़िया: सुबह 07:07 से सुबह 08:51 तक
- शाम का चौघड़िया: रात 07:17 से रात 08:33 तक
अशुभ समय और राहुकाल
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, अशुभ समय में किसी भी महत्वपूर्ण कार्य की शुरुआत करने से बचना चाहिए।
- राहुकाल: सुबह 10:36 बजे से दोपहर 12:20 बजे तक (इस दौरान कोई भी नया या मांगलिक कार्य वर्जित है)
- यमगंड काल: दोपहर 02:04 बजे से 03:48 बजे तक
- गुलिक काल: सुबह 05:23 बजे से 07:07 बजे तक
- भद्रा काल: रात 02:40 बजे से अगले दिन सुबह 05:23 बजे तक
- दिशाशूल: शनिवार के दिन पूर्व दिशा में दिशाशूल रहता है। इस दिन पूर्व दिशा की ओर यात्रा करने से सख्त बचना चाहिए। यदि यात्रा अत्यंत आवश्यक हो, तो घर से निकलने से पहले थोड़ा सा घी खाकर ही प्रस्थान करें।
विशेष ज्योतिषीय घटना: ‘मृत्यु पंचक’ का आरंभ
आज 6 जून की शाम 07:03 बजे से पंचक लग रहे हैं, जो 11 जून तक चलेंगे। ज्योतिष शास्त्र के नियमों के अनुसार, जब भी पंचक की शुरुआत शनिवार के दिन से होती है, तो उसे ‘मृत्यु पंचक’ कहा जाता है। इसे सभी प्रकार के पंचकों में सबसे अधिक खतरनाक और अशुभ माना जाता है।
मृत्यु पंचक के दौरान बरती जाने वाली आवश्यक सावधानियां:
- निर्माण कार्य की मनाही: इस अवधि में घर की नई छत डालना या किसी भी प्रकार का नया निर्माण कार्य शुरू करना पूरी तरह से वर्जित है।
- लकड़ी का सामान: इन पांच दिनों में लकड़ी से जुड़ा कोई भी भारी या बड़ा सामान, चारपाई, अथवा पलंग खरीदने से सख्त परहेज करें।
- विशेष उपाय: मान्यता है कि मृत्यु पंचक के दौरान यदि किसी व्यक्ति की मृत्यु हो जाती है, तो पंचक दोष की शांति के लिए अंतिम संस्कार के समय विशेष उपाय और पूजा करवानी अत्यंत आवश्यक है। ऐसा न करने पर परिवार पर संभावित अशुभ प्रभाव पड़ने की आशंका बनी रहती है।
(नोट: अगले 5 दिनों तक अत्यंत सतर्क रहें और कोई भी बड़ा पारिवारिक या व्यावसायिक निर्णय लेने से पूर्व शुभ समय का ध्यान अवश्य रखें।)





































