संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में अफगानिस्तान के गंभीर हालात पर एक विशेष चर्चा का आयोजन किया गया था। इस वैश्विक बैठक में भारतीय प्रतिनिधिमंडल ने पड़ोसी मुल्क की आक्रामक सैन्य नीतियों पर गहरा रोष व्यक्त किया। संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि राजदूत हरीश पर्वतनेनी ने इस चर्चा में भारत का मजबूती से पक्ष रखा। उन्होंने अफगानिस्तान की संप्रभुता के खिलाफ पाकिस्तान द्वारा किए गए सैन्य हवाई हमलों की बहुत ही कड़ी निंदा की। भारतीय दूत ने अंतरराष्ट्रीय मंच पर स्पष्ट किया कि इस तरह की आक्रामक कार्रवाइयां कतई बर्दाश्त नहीं की जा सकती हैं।
नरसंहार का रूप है कार्रवाई: भारतीय राजदूत ने सैन्य अभियानों की आड़ में हो रही क्रूरता पर वैश्विक समुदाय का ध्यान आकर्षित किया। उन्होंने दो टूक शब्दों में कहा कि किसी नरसंहार को सैन्य अभियान का रूप देने से अपराधी की जिम्मेदारी समाप्त नहीं हो जाती है। इन हमलों में लगातार आम नागरिकों की निर्मम हत्याएं की जा रही हैं जो बेहद चिंताजनक है। निर्दोष लोगों को हमेशा के लिए अपंग बनाना और छोटे बच्चों को अनाथ कर देना किसी भी नजरिए से आतंकवाद-रोधी कार्रवाई नहीं है। भारत ने इसे मानवाधिकारों का घोर उल्लंघन मानते हुए इसे तुरंत रोकने की आवश्यकता पर बल दिया है।
सेना का वास्तविक तख्तापलट: पड़ोसी देश में लोकतांत्रिक मूल्यों के पतन का मुद्दा भी भारतीय दूत ने जोरदार तरीके से उठाया। उन्होंने पाकिस्तान की संसद द्वारा पिछले साल पारित किए गए 27वें संविधान संशोधन का विशेष रूप से उल्लेख किया। भारत ने इस विवादास्पद संविधान संशोधन को सेना द्वारा किया गया एक वास्तविक तख्तापलट करार दिया है। यह सत्ता प्रतिष्ठान द्वारा अपने अधिकारों को असीमित करने का सबसे हालिया और खतरनाक उदाहरण है। इसका असली उद्देश्य देश के संसाधनों पर सेना का पूर्ण नियंत्रण स्थापित करना और सत्ता पर पकड़ मजबूत करना है।
नए रक्षा पद का सृजन: संविधान में किए गए इस बड़े बदलाव के माध्यम से पड़ोसी देश के सैन्य ढांचे में अहम परिवर्तन किए गए। संसद द्वारा पारित इस नए 27वें संशोधन के तहत वहां के सैन्य तंत्र में एक बिल्कुल नए पद को जोड़ा गया। इस विवादास्पद कदम के जरिए वहां आधिकारिक रूप से ‘चीफ ऑफ डिफेंस फोर्सेज’ (सीडीएफ) का नया पद सृजित किया गया था। इस नए शक्तिशाली पद के निर्माण से वहां की सेना को पहले से कहीं अधिक विशेषाधिकार और ताकत मिल गई है। भारतीय कूटनीतिज्ञों के अनुसार यह कदम वहां के लोकतान्त्रिक ढांचे को पूरी तरह से खोखला करने की दिशा में उठाया गया है।
पहले सीडीएफ की नियुक्ति: नए पद के सृजन के तुरंत बाद ही इस ताकतवर कुर्सी पर एक सैन्य अधिकारी की ताजपोशी कर दी गई। इसके बाद फील्ड मार्शल आसिम मुनीर को पूरे पाकिस्तान का पहला चीफ ऑफ डिफेंस फोर्सेज (सीडीएफ) नियुक्त किया गया। यह नियुक्ति इस बात का स्पष्ट प्रमाण है कि वहां की राजनीतिक व्यवस्था पर सेना का सीधा और पूरा नियंत्रण हो चुका है। सेना इस शक्ति का उपयोग आम नागरिकों को डराने और देश की मुख्य समस्याओं से ध्यान भटकाने के लिए कर रही है। वहां के हुक्मरान इसी के सहारे भारत के खिलाफ स्थायी शत्रुता का माहौल बनाए रखने की साजिश रचते हैं।
पड़ोसियों पर दोष मढ़ने की आदत: भारतीय प्रतिनिधि ने पड़ोसी देश की पुरानी मानसिकता पर करारा प्रहार करते हुए दुनिया को आगाह किया। उन्होंने वैश्विक मंच पर कहा कि अपनी खुद की रणनीतिक और आर्थिक नाकामियों के लिए हमेशा पड़ोसियों को दोष देना पाकिस्तान की पुरानी आदत रही है। वह अपनी हर घरेलू विफलता का आरोप बेबुनियाद तरीके से भारत या अन्य पड़ोसी देशों पर मढ़ने का आदी हो चुका है। हालांकि भारत ने दुनिया को आश्वस्त किया है कि इस तरह के मनगढ़ंत बयानों से अब कोई भ्रमित नहीं होने वाला है। विश्व बिरादरी के सामने दुनिया को गुमराह करने की पाकिस्तान की यह हर कुत्सित कोशिश अंततः नाकाम ही साबित होगी।





































