पाकिस्तान इन दिनों अपनी सीमाओं के बाहर और भीतर भारी विवादों का सामना कर रहा है। हाल ही में पाकिस्तानी सेना ने अफगानिस्तान के कुनार, खोस्त और पक्तिका प्रांतों में घातक हवाई हमले किए हैं। इसके साथ ही पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में नागरिक अधिकारों की मांग कर रहे लोगों पर भी कड़ी कार्रवाई हुई है। दोनों ही मामलों में मानवाधिकारों का खुला उल्लंघन हुआ है और निर्दोष लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ी है। इस दोहरी आक्रामक नीति के कारण पाकिस्तान की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारी आलोचना हो रही है।
अफगान सीमा पर भारी तबाही: पाकिस्तानी वायुसेना द्वारा अफगानिस्तान के भीतर रिहायशी इलाकों में किए गए हमले से भारी तबाही मची है। इस अप्रत्याशित बमबारी में 11 छोटे बच्चों और महिलाओं सहित कुल 13 लोगों की दर्दनाक मौत हो गई। मलबे में दबकर 14 अन्य नागरिक गंभीर रूप से घायल हो गए जिनका इलाज चल रहा है। अफगानिस्तान सरकार के प्रवक्ता जबीउल्लाह मुजाहिद ने इस हमले को अंतरराष्ट्रीय नियमों का स्पष्ट उल्लंघन करार दिया है। उन्होंने कहा कि पाकिस्तानी सेना ने अफगानिस्तान की संप्रभुता का खुलेआम हनन करके एक बड़ा अपराध किया है।
पीओके में नेताओं की तलाश: अफगानिस्तान में बर्बरता के बाद पाकिस्तान ने पीओके में जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी के नेताओं को निशाना बनाया है। प्रशासन ने शौकत नवाज़ मीर, उमर नज़ीर कश्मीरी, ख्वाजा मेहरान अरशद और सरदार अमन खान की गिरफ्तारी के आदेश दिए हैं। इन चारों प्रमुख नेताओं की सटीक जानकारी देने वाले को एक करोड़ रुपये का भारी इनाम देने की घोषणा हुई है। इस नागरिक संगठन पर स्थानीय प्रशासन ने सार्वजनिक व्यवस्था और सुरक्षा के आधार पर पहले ही प्रतिबंध लगा दिया था। नेताओं ने प्रशासन के इस कदम को आतंकवादी घोषित करने जैसी दमनकारी और क्रूर कार्रवाई बताया है।
आरक्षण और महंगाई का विरोध: पीओके में यह व्यापक अशांति मुख्य रूप से आगामी चुनावों में सीटों के आरक्षण को लेकर शुरू हुई है। प्रदर्शनकारी 27 जुलाई के चुनाव में 45 में से 12 सीटें शरणार्थियों के लिए आरक्षित करने के खिलाफ हैं। इसके अलावा बिजली कटौती, बढ़ती महंगाई और संसाधनों के कथित दोहन ने भी स्थानीय लोगों के गुस्से को भड़काया है। इस पूरे विवाद के दौरान भड़की व्यापक हिंसा में 100 से ज्यादा बेगुनाह प्रदर्शनकारी अपनी जान गंवा चुके हैं। वहीं प्रशासन की इस दमनकारी कार्रवाई में 400 से ज्यादा लोग बुरी तरह घायल होकर अस्पतालों में भर्ती हैं।
मानवाधिकार संगठन की फटकार: पाकिस्तान के इस क्रूर रवैये को लेकर उसी के मानवाधिकार आयोग ने सख्त नाराजगी जाहिर की है। आयोग ने नागरिक मौतों, अत्यधिक बल प्रयोग और इंटरनेट शटडाउन जैसी अलोकतांत्रिक कार्रवाइयों की कड़ी निंदा की है। उनका स्पष्ट रूप से कहना है कि राजनीतिक अधिकारों से वंचित रखकर शांतिपूर्ण समाधान कभी नहीं निकाला जा सकता। आयोग ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि नागरिकों के शांतिपूर्ण विरोध के अधिकार का हमेशा सम्मान होना चाहिए। जनता की जायज शिकायतों का समाधान भी एक पारदर्शी और लोकतांत्रिक प्रक्रिया के तहत किया जाना चाहिए।
भारत की सख्त प्रतिक्रिया: पड़ोसी देश में हो रही इस पूरी उथल-पुथल और अत्याचार पर भारत ने कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। भारतीय विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने पीओके में प्रदर्शनकारियों पर हुई हिंसक कार्रवाई की निंदा की है। भारत ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि पाकिस्तान को उसके गलत कामों के लिए पूरी तरह जवाबदेह ठहराया जाना चाहिए। नई दिल्ली ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से अपील की है कि वह पाकिस्तान की इन ज्यादतियों पर तुरंत ध्यान दे। इस प्रकार पाकिस्तान अपनी आंतरिक और बाहरी दोनों मोर्चों पर लगातार अंतरराष्ट्रीय दबाव का सामना कर रहा है।





































