आज 4 जून 2026, दिन गुरुवार है। आज का दिन सनातन धर्म में विशेष धार्मिक महत्व रखता है क्योंकि आज विघ्नहर्ता, मंगलकर्ता भगवान श्री गणेश की आराधना को समर्पित विभुवन संकष्टी चतुर्थी का पावन पर्व मनाया जा रहा है। पंचांग की गणना के अनुसार, यह चतुर्थी अत्यंत दुर्लभ और विशेष फलदायी मानी जाती है, क्योंकि इसका अद्भुत संयोग पुरुषोत्तम मास (जिसे अधिक मास या मलमास भी कहा जाता है) के कृष्ण पक्ष में बन रहा है।
इस विस्तृत लेख में जानिए आज के दिन के शुभ मुहूर्त, ग्रहों की स्थिति और वे अशुभ समय जब आपको कोई भी नया कार्य करने से बचना चाहिए।
विभुवन संकष्टी चतुर्थी का धार्मिक महत्व
शास्त्रों में भगवान श्री गणेश के ‘विभुवन’ रूप की पूजा का विशेष विधान बताया गया है। ‘विभुवन’ का अर्थ है—वह देव जो तीनों लोकों अर्थात स्वर्ग लोक, पृथ्वी लोक और पाताल लोक में सर्वत्र विद्यमान हैं। मान्यता है कि आज के दिन विघ्नहर्ता के इस विराट और सर्वव्यापी स्वरूप की विशेष पूजा-अर्चना करने से भक्तों के जीवन के सभी बड़े से बड़े कष्ट, रोग और बाधाएं दूर हो जाती हैं।
चतुर्थी तिथि का समय और उदयातिथि
हिंदू धर्म में किसी भी व्रत या त्योहार की प्रामाणिकता उदयातिथि (सूर्य उदय के समय जो तिथि हो) से तय की जाती है।
- चतुर्थी तिथि का आरंभ: 3 जून 2026, रात 9 बजकर 21 मिनट से।
- चतुर्थी तिथि का समापन: 4 जून 2026, रात 11 बजकर 30 मिनट पर।
- निष्कर्ष: उदयातिथि के अनुसार, 4 जून को ही पूरे दिन चतुर्थी तिथि का मान रहेगा और इसी दिन व्रत व पूजा-अनुष्ठान विधि-विधान से किए जाएंगे।
सूर्य और चंद्रमा की स्थिति
संकष्टी चतुर्थी के व्रत में चंद्र दर्शन का विशेष महत्व होता है। आज के सूर्य और चंद्रमा के उदय व अस्त होने का समय इस प्रकार है:
- सूर्योदय: प्रातः 5 बजकर 23 मिनट पर।
- सूर्यास्त: संध्या 7 बजकर 16 मिनट पर।
- चंद्रोदय: रात्रि 10 बजकर 43 मिनट पर। (व्रती इस समय चंद्रमा को अर्घ्य दे सकते हैं)।
- चंद्रास्त: अगले दिन (5 जून) प्रातः 8 बजकर 17 मिनट पर।
आज का नक्षत्र, योग और करण
- नक्षत्र: आज ‘उत्तराषाढ़ा’ नक्षत्र है, जो 5 जून की सुबह 3 बजकर 41 मिनट तक प्रभावी रहेगा।
- योग: प्रातः 9 बजकर 3 मिनट तक ‘शुक्ल योग’ रहेगा, जिसके तुरंत बाद अत्यंत शुभ ‘ब्रह्म योग’ लग जाएगा।
- करण: आज ‘बव’ करण विद्यमान रहेगा।
शुभ मुहूर्तों का महासंयोग
इस वर्ष विभुवन संकष्टी चतुर्थी पर एक अत्यंत दुर्लभ और शुभ संयोग बन रहा है। आज ‘अभिजीत मुहूर्त’ और ‘विजय मुहूर्त’ एक साथ पड़ रहे हैं, जिसे किसी भी नए कार्य, व्यापारिक शुरुआत या मंगल कार्य के लिए सर्वश्रेष्ठ माना जाता है।
- ब्रह्म मुहूर्त: प्रातः 4 बजकर 2 मिनट से प्रातः 4 बजकर 43 मिनट तक। (यह समय ध्यान और ईश्वर वंदना के लिए सर्वोत्तम है)।
- अभिजीत मुहूर्त: दोपहर 11 बजकर 52 मिनट से दोपहर 12 बजकर 47 मिनट तक।
- विजय मुहूर्त: दोपहर 2 बजकर 38 मिनट से दोपहर 3 बजकर 34 मिनट तक।
- गोधूलि मुहूर्त: संध्या 7 बजकर 15 मिनट से संध्या 7 बजकर 35 मिनट तक।
- अमृत काल: रात्रि 8 बजकर 34 मिनट से रात्रि 10 बजकर 21 मिनट तक।
राहुकाल और अशुभ समय (इन समयों में रखें विशेष सावधानी)
धर्म शास्त्रों और वैदिक पंचांग के अनुसार, दिन के कुछ प्रहर ऐसे होते हैं जिनमें कोई भी नया कार्य, आर्थिक लेन-देन या शुभ अनुष्ठान शुरू नहीं करना चाहिए। आज के दिन के अशुभ समय इस प्रकार हैं, जिनका आपको विशेष ध्यान रखना चाहिए:
- राहुकाल: दोपहर 2 बजकर 4 मिनट से दोपहर 3 बजकर 48 मिनट तक।
- यमगंड काल: प्रातः 5 बजकर 23 मिनट से प्रातः 7 बजकर 7 मिनट तक।
- गुलिक काल: प्रातः 8 बजकर 51 मिनट से प्रातः 10 बजकर 35 मिनट तक।
- दुर्मुहूर्त: प्रातः 10 बजकर 01 मिनट से प्रातः 10 बजकर 56 मिनट तक।
(विशेष नोट: शुभ और मांगलिक कार्यों की सफलता के लिए राहुकाल की अवधि को अवश्य टाल देना चाहिए।)





































