वैश्विक स्तर पर अमेरिका और ईरान के बीच चल रहा भीषण युद्ध अब आधिकारिक रूप से समाप्त हो गया है। दोनों देशों की सेनाओं के बीच 108 दिनों तक चले भयंकर खून-खराबे के बाद स्थायी युद्धविराम हुआ है। इस बड़े समझौते के बाद दुनिया भर पर लगी तेलबंदी को पूरी तरह से हटाने का समय आ गया है। दोनों देशों के शीर्ष नेता इस पर्मानेंट युद्धविराम समझौते को लागू करने के लिए पूरी तरह राजी हो गए हैं। स्विट्ज़रलैंड के जिनेवा शहर में आगामी 19 जून दिन शुक्रवार को इस पीस डील पर हस्ताक्षर किए जाएंगे।
ईरानी मीडिया का दावा: इस बड़े वैश्विक घटनाक्रम के बीच ईरानी मीडिया ने दोनों देशों की इस डील को लेकर बड़ी खबरें दी हैं। खबरों के अनुसार ईरान ने इस शांति समझौते के सफल क्रियान्वयन के लिए कुल 14 शर्तें सामने रखी हैं। इन शर्तों के तहत जब तक 12 अरब डॉलर की राशि जारी नहीं होती अंतिम बातचीत शुरू नहीं होगी। इसके साथ ही ईरान के तेल पर लगी सभी पाबंदियां हटाने और नाकेबंदी खत्म करने की बात कही गई है। इन प्रारंभिक मांगों के पूरे होने के बाद ही दोनों देशों के बीच अंतिम दौर की वार्ता शुरू की जाएगी।
आर्थिक और पुनर्निर्माण शर्तें: ईरान की शर्तों के अनुसार उसके तेल, पेट्रोकेमिकल्स और उससे जुड़े एक्सपोर्ट से पाबंदियां हटा ली जाएंगी। इस समझौते के लागू होते ही ईरान को अपने सभी वित्तीय संसाधनों का पूरा एक्सेस दोबारा मिल जाएगा। अगले 60 दिनों की बातचीत की अवधि के दौरान ईरान के फ्रीज़ किए गए 24 अरब डॉलर जारी किए जाएंगे। इस कुल राशि में से 12 अरब डॉलर बातचीत की प्रक्रिया शुरू होने से पहले ही दे दिए जाएंगे। अमेरिका और उसके सहयोगी देशों को ईरान के पुनर्निर्माण हेतु 300 अरब डॉलर की योजनाएं पेश करनी होंगी।
क्षेत्रीय सुरक्षा और संप्रभुता: शांति समझौते के तहत लेबनान सहित सभी मोर्चों पर जारी युद्ध तुरंत और हमेशा के लिए बंद कर दिया जाएगा। अमेरिका भविष्य में ईरान के आंतरिक मामलों में दखल न देने और उसकी संप्रभुता का सम्मान करने का वादा करेगा। अमेरिका द्वारा समुद्र में लगाई गई नौसैनिक नाकेबंदी को 30 दिनों के भीतर पूरी तरह हटा लिया जाएगा। इसके प्रभाव से अमेरिकी सेनाएं भी ईरान के आसपास के सभी रणनीतिक इलाकों से पूरी तरह पीछे हट जाएंगी। इसके साथ ही प्रसिद्ध होर्मुज स्ट्रेट को ईरान की व्यवस्था के तहत 30 दिनों के भीतर दोबारा खोल दिया जाएगा।
परमाणु वार्ता का खाका: परमाणु मुद्दों और पाबंदियों को पूरी तरह समाप्त करने के लिए 60 दिनों की आधिकारिक बातचीत शुरू होगी। इस महत्वपूर्ण वार्ता के दौरान ईरान परमाणु हथियार न बनाने के अपने NPT के वादे को दोबारा दोहराएगा। अमेरिका इस बातचीत के दौरान क्षेत्र में अपनी सेना न बढ़ाने और नई पाबंदियां न लगाने पर सहमत होगा। इस पूरी डील पर नज़र रखने के लिए एक निगरानी तंत्र बनेगा जिसे संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की मंज़ूरी मिलेगी। हालांकि ईरान के मिसाइल कार्यक्रम और रेसिस्टेंस ग्रुप को समर्थन देने के मुद्दे पर कोई बातचीत नहीं होगी।
इजरायल की प्रतिक्रिया का सवाल: इस शांति समझौते के सामने आने के बाद यह सवाल उठ रहा है कि क्या पीएम नेतन्याहू इससे खुश हैं। इसका मुख्य कारण यह है कि ईरान द्वारा रखी गई शर्तों में सबसे पहले नंबर पर लेबनान का मुद्दा है। इजरायल की सेना ने महज 24 घंटे पहले ही बेरूत शहर में एक बार फिर भीषण बमबारी की है। अब पूरी दुनिया की नजरें इस बात पर हैं कि क्या ट्रंप इजरायली प्रधानमंत्री नेतन्याहू को मना पाएंगे। इसके साथ ही यह भी देखना होगा कि क्या इजरायली फौज लेबनान के मोर्चे से पीछे हटने को तैयार होती है।





































