भूटान में देर रात हिली धरती जर्मन रिसर्च सेंटर फॉर जियोसाइंसेज के अनुसार रविवार देर रात भूटान में 5.6 तीव्रता का तीव्र भूकंप दर्ज किया गया। यह झटकेदार प्राकृतिक आपदा भारतीय समयानुसार रात करीब 11:06 बजे पुनाखा के पास उत्पन्न हुई। इस भूकंप का मुख्य केंद्र असम के कुछ हिस्सों से लगभग 252 किलोमीटर की दूरी पर स्थित था। इसके परिणामस्वरूप असम और मेघालय सहित पूर्वोत्तर भारत, बांग्लादेश, नेपाल तथा चीन में झटके महसूस किए गए। दहशत के कारण कई लोगों ने अपने घर खाली कर दिए, लेकिन अभी तक किसी नुकसान की खबर नहीं है।
फिलीपींस में शक्तिशाली झटके सोमवार की सुबह फिलीपींस के दक्षिणी हिस्से में 7.8 मैग्नीट्यूड का एक बेहद विनाशकारी भूकंप आया। फिलीपीन इंस्टीट्यूट ऑफ वोल्केनोलॉजी के अनुसार इसका केंद्र मिंडानाओ द्वीप पर जनरल सैंटोस शहर के पास था। स्थानीय समयानुसार सुबह 7:37 बजे आए इस भीषण भूकंप की गहराई धरती की सतह से 10 किलोमीटर नीचे थी। इस जोरदार झटके के कारण कई प्रभावित इलाकों में तुरंत बिजली गुल होने की खबर सामने आई। इसके तुरंत बाद स्थानीय प्रशासन ने लोगों से सतर्क रहने और सुरक्षित व ऊंची जगहों पर जाने की अपील की।
लगातार तीन बड़े झटके नेशनल सेंटर फॉर सिस्मोलॉजी की रिपोर्ट के अनुसार सुबह 5:07 बजे से 6:25 बजे के बीच तीन बार धरती कांपी। सबसे पहला भूकंप 7.7 तीव्रता का था, जिसका केंद्र सतह से 93 किलोमीटर की गहराई में मौजूद था। इसके बाद सुबह 5:18 बजे 6.4 तीव्रता का दूसरा झटका महसूस किया गया, जिसकी गहराई 79 किलोमीटर थी। फिर सुबह 6:25 बजे 6.6 तीव्रता का तीसरा झटका आया, जिसका केंद्र सतह से 76 किलोमीटर नीचे था। यह देश प्रशांत महासागर के ‘रिंग ऑफ फायर’ पर स्थित होने के कारण हमेशा ऐसी आपदाओं की चपेट में रहता है।
सुनामी का अलर्ट जारी इस भीषण भूकंप के तुरंत बाद पैसिफिक सुनामी वॉर्निंग सेंटर ने कई देशों के लिए गंभीर सुनामी अलर्ट जारी कर दिया। चेतावनी में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि फिलीपींस के कुछ तटों पर तीन मीटर तक ऊंची खतरनाक लहरें उठ सकती हैं। इसके अलावा इंडोनेशिया और मलेशिया के कुछ तटीय इलाकों में भी एक मीटर तक ऊंची लहरें आने की आशंका है। विशेषज्ञ टेरेसिटो बैकोलकोल ने तटीय निवासियों को चेतावनी देते हुए तुरंत ऊंची और सुरक्षित जगहों की ओर जाने की सख्त सलाह दी है। इसके साथ ही ताइवान, जापान, गुआम और पापुआ न्यू गिनी में भी छोटी सुनामी लहरें उठने की प्रबल संभावना है।
भारत में मंडराता खतरा भूगर्भ विशेषज्ञों के मुताबिक हमारी धरती के अंदर सात टेक्टोनिक प्लेट्स मौजूद हैं जो हमेशा अपनी जगह पर घूमती रहती हैं। इन विशाल प्लेटों के आपस में टकराने और तेज घर्षण होने के कारण ही सतह पर बार-बार भूकंप आते हैं। भारत के कुल भूभाग का लगभग 59 फीसदी हिस्सा भूकंप के लिहाज से अत्यंत संवेदनशील और खतरनाक माना जाता है। वैज्ञानिकों ने देश को चार भूकंप क्षेत्रों में बांटा है, जिसमें जोन-5 को सबसे ज्यादा संवेदनशील इलाका घोषित किया गया है। हमारे देश की राजधानी दिल्ली भूकंप के जोन-4 में आती है, जहां बड़े भूकंप आने पर भारी तबाही मच सकती है।
रिक्टर स्केल और तबाही भूकंप की तीव्रता और उससे होने वाले नुकसान को मापने के लिए हमेशा रिक्टर स्केल का उपयोग किया जाता है। रिक्टर स्केल पर 5 से 5.9 की तीव्रता वाले भूकंप में घरों में रखा भारी फर्नीचर भी अपनी जगह से हिलने लगता है। जब यह तीव्रता 6 से 6.9 तक पहुंचती है, तो मजबूत से मजबूत इमारतों का बेस भी बुरी तरह दरक सकता है। सात से अधिक तीव्रता वाले भूकंप इमारतों को गिरा देते हैं, जबकि 8 से अधिक की तीव्रता सुनामी का कारण बनती है। भूटान और पूर्वोत्तर भारत का हिमालयी क्षेत्र भी इन झटकों का शिकार है क्योंकि भारतीय और यूरेशियन प्लेटों में लगातार टकराव जारी है।





































