कानपुर पुलिस ने किडनी रैकेट मामले में अपनी कार्रवाई तेज करते हुए कई जिलों में एक साथ दबिश दी है। जांच में यह चौंकाने वाली बात सामने आई है कि यह Organ Trafficking नेटवर्क पिछले 5 सालों से चुपचाप अपना काम कर रहा था।
प्रयागराज में छापेमारी (Raids in Prayagraj): पुलिस की एक टीम ने जब प्रयागराज में नवीन पांडेय के घर पर छापा मारा, तो वह फरार मिला। हालांकि, नवीन की पत्नी से हुई पूछताछ में बड़े खुलासे हुए। पत्नी ने स्वीकार किया कि नवीन पिछले 5 सालों से डॉ. रोहित के साथ मिलकर इस सिंडिकेट को चला रहा है। मुख्य आरोपी शिवम तो इस गैंग में महज एक साल पहले ही शामिल हुआ था। इससे यह साफ होता है कि गिरोह की जड़ें बहुत गहरी हैं।
गिरफ्तारियां और हिरासत (Arrests & Detentions): पुलिस ने इस मामले में शिकंजा कसते हुए कई महत्वपूर्ण कड़ियों को जोड़ा है:
- डॉ. रोहन (Kannauj): कन्नौज से डॉ. रोहन को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है।
- नरेंद्र सविता (Auraiya): औरैया निवासी नरेंद्र को कल्याणपुर के पनकी रोड से दबोचा गया है।
- फरार आरोपी: पुलिस अब नवीन पांडेय और दलाल साहिल की तलाश में संभावित ठिकानों पर छापेमारी कर रही है।
प्रशासनिक रुख (Police Statement): डीसीपी पश्चिम एस.एम. कासिम आब्दी ने स्पष्ट किया है कि पुलिस के पास अब ठोस Digital Evidence मौजूद हैं। यह गिरोह गरीबों की मजबूरी का फायदा उठाकर अंगों की तस्करी करता था। पुलिस अब इस बात की जांच कर रही है कि इस रैकेट में और कितने बड़े अस्पतालों या डॉक्टरों के नाम शामिल हैं।
मुख्य बिंदु (Key Highlights):
- 22 Lakh Deal: एक किडनी के सौदे के लिए 22 लाख रुपये की मांग का खुलासा।
- 5 Years Tenure: गिरोह पिछले 5 वर्षों से डॉ. रोहित के साथ सक्रिय था।
- Evidence: मुख्य अभियुक्त के फोन से मिली ऑडियो रिकॉर्डिंग सबसे बड़ा सबूत।
- Target Areas: प्रयागराज, कन्नौज और औरैया में पुलिस की स्पेशल टीमों की दबिश।





































