भारत के आधिकारिक दौरे पर आए म्यांमार के राष्ट्रपति मिन आंग ह्लाइंग ने अपनी यात्रा के दौरान सबसे पहले बिहार राज्य का दौरा किया। उन्होंने बोधगया स्थित विश्व प्रसिद्ध और पवित्र महाबोधि मंदिर में पहुंचकर पूरी श्रद्धा के साथ विशेष पूजा-अर्चना की। इस दौरान उन्होंने मंदिर परिसर का बारीकी से अवलोकन किया और वहां मौजूद भिक्षुओं से आशीर्वाद भी प्राप्त किया। म्यांमार के राष्ट्रपति की इस धार्मिक यात्रा को दोनों देशों के बीच के सांस्कृतिक संबंधों को प्रगाढ़ करने की दिशा में एक बहुत बड़ा और प्रभावी कदम माना जा रहा है।
आध्यात्मिक संबंधों का अनूठा प्रदर्शन विदेश मंत्रालय के आधिकारिक प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने राष्ट्रपति की इस धार्मिक यात्रा पर सोशल मीडिया के माध्यम से अपने विचार साझा किए हैं। रणधीर जायसवाल ने स्पष्ट रूप से कहा कि राष्ट्रपति ह्लाइंग की यह यात्रा दोनों देशों के बीच प्राचीनकाल से चले आ रहे बौद्ध विरासत को मजबूती से रेखांकित करती है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर अपने एक पोस्ट में रणधीर जायसवाल ने लिखा कि म्यांमार के राष्ट्रपति यू मिन आंग ह्लाइंग ने आज बोधगया का दौरा किया। उन्होंने वहां के अत्यंत पवित्र महाबोधि मंदिर में जाकर पूरी विधि-विधान से विशेष पूजा-अर्चना संपन्न की।
सभ्यतागत संबंधों की गहरी झलक यह महत्वपूर्ण यात्रा भारत और म्यांमार के बीच के बेहद गहरे आध्यात्मिक और सभ्यतागत संबंधों को बहुत ही सुंदर ढंग से दुनिया के सामने दर्शाती है। यह ऐतिहासिक संबंध दोनों देशों के बीच की साझा बौद्ध विरासत में पूरी तरह से रचे-बसे हैं। यही वह अनूठी विरासत है जो पीढ़ियों से दोनों देशों के आम लोगों को आपस में भावनात्मक रूप से जोड़ती आ रही है। बोधगया की इस पावन भूमि से म्यांमार के राष्ट्रपति ने दोनों देशों की इस साझी और प्राचीन संस्कृति को एक बार फिर से जीवंत करने का सफल संदेश दिया है।
प्रतिनिधिमंडल भी रहा साथ मौजूद राष्ट्रपति मिन आंग ह्लाइंग के इस बोधगया दौरे के समय उनके साथ आया म्यांमार का उच्च स्तरीय प्रतिनिधिमंडल भी मंदिर परिसर में मुख्य रूप से मौजूद रहा। इस दल में शामिल म्यांमार सरकार के मंत्रिमंडल मंत्रियों और वरिष्ठ अधिकारियों ने भी महाबोधि वृक्ष के दर्शन किए और वहां प्रार्थना की। इसके साथ ही प्रतिनिधिमंडल में शामिल प्रमुख व्यापारिक नेताओं ने भी इस धार्मिक और सांस्कृतिक अनुभव को दोनों देशों के संबंधों के लिए सुखद बताया। इस यात्रा के दौरान सुरक्षा के बेहद कड़े और पुख्ता इंतजाम स्थानीय प्रशासन द्वारा किए गए थे।
दो जून तक जारी रहेगा दौरा म्यांमार के राष्ट्रपति की यह अत्यंत महत्वपूर्ण और बहुप्रतीक्षित भारत यात्रा तीस मई से शुरू होकर आगामी दो जून तक पूरी तरह जारी रहेगी। राष्ट्रपति बनने के बाद भारत की धरती पर उनका यह पहला कदम है, जो इस यात्रा को राजनीतिक और कूटनीतिक रूप से बेहद खास बनाता है। बोधगया में अपनी धार्मिक यात्रा को सफलतापूर्वक पूरा करने के बाद वे अपने अगले कार्यक्रम के लिए देश की राजधानी नई दिल्ली के लिए रवाना हो गए। दिल्ली में उनकी अगुवाई के लिए भारत सरकार की तरफ से विशेष तैयारियां पहले से ही की गई थीं।
दिल्ली में द्विपक्षीय साझेदारी पर चर्चा नई दिल्ली पहुंचने पर म्यांमार के राष्ट्रपति का स्वागत राज्य मंत्री कीर्ति वर्धन सिंह द्वारा किया गया, जिसके बाद कूटनीतिक बैठकों का दौर शुरू हुआ। विदेश मंत्री एस जयशंकर से मुलाकात के बाद अब वे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ एक बेहद उच्च स्तरीय बैठक में हिस्सा लेने वाले हैं। इस बैठक में दोनों देशों के बीच आर्थिक प्रगति, शांति और व्यापारिक साझेदारी को आगे बढ़ाने पर अंतिम चर्चा की जाएगी। म्यांमार के राष्ट्रपति की इस चार दिवसीय भारत यात्रा से दोनों देशों के बीच आपसी विश्वास और सहयोग का एक नया अध्याय शुरू होने जा रहा है।





































