उत्तर प्रदेश में राज्य सरकार ने अपनी विभिन्न आंगनबाड़ी और पोषण योजनाओं को आधुनिक तकनीक से जोड़ दिया है। इस महत्वपूर्ण कदम से इन सभी पुरानी सरकारी योजनाओं को एक बिल्कुल नई और डिजिटल पहचान मिल गई है। अब लाभार्थियों का सारा पंजीकरण और व्यवस्था की पूरी निगरानी सिर्फ डिजिटल माध्यम से ही संपन्न की जा रही है। तकनीक के इस व्यापक उपयोग से विभागीय योजनाओं में पहले से बहुत ज्यादा पारदर्शिता और प्रभावशीलता साफ दिखाई दे रही है। बाल विकास एवं पुष्टाहार विभाग लगातार इस डिजिटल बदलाव को और अधिक मजबूत बनाने का निरंतर प्रयास कर रहा है।
आधुनिक ट्रैकर से निगरानी राज्य पोषण मिशन ने प्रदेश भर में एक नई और विशेष पोषण ट्रैकर प्रणाली को सफलता से लागू किया है। इस ट्रैकर प्रणाली ने पुरानी आंगनबाड़ी व्यवस्था को आज के समय के हिसाब से काफी आधुनिक और जवाबदेह बना दिया है। नई तकनीक आधारित व्यवस्थाओं के कारण अब उच्च स्तर से योजनाओं की जमीनी निगरानी करना बेहद आसान हो गया है। इसके परिणामस्वरूप अब बिल्कुल समयबद्ध तरीके से सभी लाभार्थियों को उनके हिस्से की सुविधाएं आराम से उपलब्ध कराई जा रही हैं। सरकार की इस डिजिटल योजना ने विभाग के हर कर्मचारी को अपने काम के प्रति ज्यादा जिम्मेदार बना दिया है।
अंतिम व्यक्ति तक पहुंची सुविधा राज्य के मुख्यमंत्री का स्पष्ट उद्देश्य पोषण और स्वास्थ्य सेवाओं को समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाना है। मुख्यमंत्री यह सुनिश्चित करना चाहते हैं कि यह पूरी प्रक्रिया एकदम पारदर्शी और हर तरीके से प्रभावी बनी रहे। प्रदेश में लागू किए गए इस शानदार डिजिटल मॉडल को अब देश के अन्य राज्यों के लिए भी एक बेहतरीन उदाहरण माना जा रहा है। सरकार की इस पहल से प्रदेश की लाखों महिलाओं और छोटे बच्चों को उनके अधिकार का लाभ सीधा मिल रहा है। इस पूरी तकनीकी व्यवस्था से गरीब तबके को बेहतर पोषण, जरूरी स्वास्थ्य सुरक्षा और उचित सामाजिक संरक्षण प्राप्त हो रहा है।
रिकॉर्ड पंजीकरण का आंकड़ा महिला एवं बाल विकास विभाग के उच्च अधिकारियों ने इस तकनीकी प्रणाली के शानदार परिणाम आज साझा किए हैं। अधिकारियों ने बताया कि इस समय फेस रिकग्निशन सिस्टम के जरिए लाभार्थियों का सत्यापन और पंजीकरण किया जा रहा है। इस सिस्टम की मदद से प्रदेश में अब तक करीब अट्ठानवे दशमलव सात छह प्रतिशत लाभार्थियों का पंजीकरण पूरा हो चुका है। यह चेहरा पहचानने वाली व्यवस्था लाभार्थियों की सही पहचान को सुनिश्चित करने में अपनी अहम भूमिका लगातार निभा रही है। यह आंकड़ा बताता है कि सरकार की यह नई तकनीकी योजना कितनी तेजी से और सफलतापूर्वक जमीन पर लागू हुई है।
फर्जी नामों पर लगाम नई तकनीक के आने से सिस्टम में मौजूद भ्रष्टाचार और फर्जीवाड़े पर एक बहुत ही करारी चोट लगी है। अब इस नई डिजिटल व्यवस्था से सभी फर्जी नामों और गलत लाभार्थियों की प्रविष्टियों पर प्रभावी रोक लग गई है। इसका सीधा परिणाम यह हुआ है कि योजनाओं का पूरा लाभ अब सिर्फ वास्तविक पात्र महिलाओं और बच्चों तक ही पहुंच रहा है। किसी भी अपात्र व्यक्ति को अब इन जरूरी पोषण योजनाओं का गलत तरीके से लाभ उठाने का कोई मौका नहीं मिल रहा है। इससे सरकारी धन की पूरी बचत हो रही है और जरूरतमंदों का अधिकार उन्हें सुरक्षित तरीके से मिल रहा है।
ऑनलाइन सेवाओं में सुधार पोषण ट्रैकर प्रणाली के माध्यम से विभाग के पास अब हर एक लाभार्थी का पूरा विवरण डिजिटल रूप से मौजूद रहता है। इस प्रणाली से गर्भवती महिलाओं, धात्री माताओं और बच्चों का सारा रिकॉर्ड अब ऑनलाइन पोर्टल पर हर समय उपलब्ध हो रहा है। रिकॉर्ड ऑनलाइन होने की वजह से योजनाओं की लगातार निगरानी करने और उनकी समय-समय पर समीक्षा करने में काफी आसानी हो रही है। हर स्तर पर होने वाली इस डिजिटल रिकॉर्डिंग के कारण जमीनी सेवाओं की गुणवत्ता में भी व्यापक सुधार देखने को मिला है। इससे सरकार और जनता के बीच का आपसी भरोसा भी इस नई पारदर्शी व्यवस्था के कारण काफी ज्यादा मजबूत हुआ है।





































