हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) ने तेजस एमके-1ए प्रोजेक्ट में हुए बड़े फर्जीवाड़े के खिलाफ बेहद सख्त कदम उठाया है। इस चौंकाने वाले खुलासे के तुरंत बाद, आरोपी कंपनी टेक एयरो डिवाइस को तत्काल प्रभाव से व्यापार करने से रोक दिया गया है। कंपनी को 10 मार्च 2027 (10.03.2027) तक पूरे तीन साल की लंबी अवधि के लिए एचएएल के साथ किसी भी प्रकार के व्यापारिक लेन-देन के लिए ब्लैकलिस्ट कर दिया गया है। इसके साथ ही एचएएल (HAL) ने यह भी स्पष्ट रूप से बताया है कि इस प्रतिबंध की तारीख तक उनके एयरक्राफ्ट डिवीजन की ओर से टेक एयरो डिवाइस को एक भी रुपये का कोई वित्तीय भुगतान नहीं किया गया था।
कारण बताओ नोटिस और स्पष्टीकरण: इस पूरे फर्जीवाड़े की असलियत सामने आने के बाद एचएएल (HAL) ने कानूनी प्रक्रिया का पालन करते हुए कार्रवाई आगे बढ़ाई। 29 नवंबर 2023 को एक्सिस इंस्पेक्शन सॉल्यूशंस से प्राप्त पत्र के ठोस आधार पर आरोपी कंपनी टेक एयरो डिवाइस हैदराबाद को एक सख्त ‘कारण बताओ नोटिस’ जारी किया गया। इस नोटिस में कंपनी को व्यापारिक लेन-देन से पूरी तरह रोकने का प्रस्ताव रखा गया था और उनसे जवाब मांगा गया था। यह कदम इसलिए उठाया गया क्योंकि एक्सिस इंस्पेक्शन सॉल्यूशंस ने अपने पत्र में साफ कहा था कि टेक एयरो डिवाइस ने जानबूझकर उनके नाम का दुरुपयोग किया और 199 जाली रिपोर्ट जमा करके बड़ा अपराध किया है।
कंपनी ने मांगी गलती की माफी: एचएएल (HAL) द्वारा ‘कारण बताओ नोटिस’ मिलने के बाद टेक एयरो डिवाइस कंपनी पूरी तरह से बैकफुट पर आ गई। अपने बचाव में उन्होंने 20 दिसंबर 2023 (20.12.2023) को एक आधिकारिक पत्र लिखकर एचएएल के सामने अपनी बात रखी। इस पत्र में कंपनी ने अपनी इस भारी गलती और फर्जीवाड़े को स्वीकार किया और अनुरोध किया कि उनकी इस ‘गलती’ को माफ कर दिया जाए। हालांकि, राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े इस अत्यंत संवेदनशील लड़ाकू विमान प्रोजेक्ट में इतनी बड़ी धोखाधड़ी को केवल एक गलती मानकर माफ करना एचएएल (HAL) के लिए किसी भी कीमत पर संभव नहीं था।
आपूर्तिकर्ताओं की सूची से हटाया गया नाम: टेक एयरो डिवाइस द्वारा मांगे गए माफीनामे को हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) ने सिरे से खारिज कर दिया। इसके बाद, 06 जनवरी 2024 (06.01.2024) को एक आधिकारिक पत्र के माध्यम से एचएएल एयरक्रॉफ्ट डिवीजन ने टेक एयरो डिवाइस हैदराबाद को अपना अंतिम और सख्त फैसला सुना दिया। पत्र में स्पष्ट रूप से सूचित किया गया कि इस गंभीर धोखाधड़ी के कारण उन्हें तीन साल की अवधि के लिए एचएएल (HAL) के ‘स्वीकृत आपूर्तिकर्ताओं’ (Approved Suppliers) की सूची से पूरी तरह हटा दिया गया है। यह कार्रवाई भविष्य में ऐसी किसी भी धोखाधड़ी को रोकने के लिए एक कड़े संदेश के रूप में की गई थी।
आंतरिक बैठकों के बाद लिया गया एफआईआर का निर्णय: कंपनी को ब्लैकलिस्ट करने के बाद एचएएल (HAL) ने इस मामले की गंभीरता को देखते हुए कानूनी कार्रवाई करने पर भी विचार किया। इसके लिए विभाग के उच्चाधिकारियों के बीच कई दौर की गंभीर आंतरिक बैठकें आयोजित की गईं। इन बैठकों में पूरे मामले के हर पहलू और सबूतों की बारीकी से जांच की गई। लंबी चर्चाओं के बाद अंततः यह सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि केवल ब्लैकलिस्ट करना काफी नहीं है, बल्कि टेक एयरो डिवाइस के खिलाफ आपराधिक साजिश और धोखाधड़ी की एफआईआर (FIR) दर्ज करके सख्त पुलिस कार्रवाई भी शुरू की जानी चाहिए।
कानूनी प्रक्रिया में हुई थोड़ी देरी: एफआईआर दर्ज कराने की इस पूरी आंतरिक प्रक्रिया और सभी कानूनी पहलुओं को बारीकी से समझने के कारण पुलिस में शिकायत दर्ज करने में विभाग को थोड़ी देरी का सामना करना पड़ा। हालांकि, अब एचएएल (HAL) एयरक्राफ्ट डिवीजन के डिप्टी जनरल मैनेजर ने पूरी मजबूती के साथ पुलिस में अपनी आधिकारिक शिकायत दर्ज करा दी है। शिकायतकर्ता ने पुलिस से विशेष रूप से अनुरोध किया है कि 199 जाली टेस्ट रिपोर्ट जमा करने जैसे गंभीर अपराध के लिए टेक एयरो डिवाइस के खिलाफ सख्त से सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए। इसी विस्तृत और ठोस आधार पर यह पुलिस शिकायत दर्ज कराई गई है।





































