पश्चिम बंगाल स्थित भारत और बांग्लादेश की सीमा पर इन दिनों सुरक्षा व्यवस्था को अभूतपूर्व रूप से कड़ा कर दिया गया है। दो हजार किलोमीटर से भी अधिक लंबी इस सीमा रेखा की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए सभी संबंधित एजेंसियां दिन-रात काम कर रही हैं। वैध रूप से आने-जाने वाले यात्रियों और व्यापारिक सामानों की चेकिंग के लिए कुल छह इंटीग्रेटेड चेक पोस्ट पूरी क्षमता के साथ काम कर रहे हैं। इन सभी केंद्रों पर सुरक्षा बलों और कस्टम अधिकारियों की पैनी नजर लगातार बनी रहती है।
इंटीग्रेटेड चेक पोस्ट के नाम: सीमा पर सक्रिय इन छह प्रमुख केंद्रों में हिली, चंगराबांधा, घोजाडांगा, महादीपुर, फुलबाड़ी और पेट्रापोल के नाम शामिल हैं। इन सभी स्थानों पर अवैध गतिविधियों को रोकने के लिए इमिग्रेशन अधिकारियों के साथ बीएसएफ के जवान तैनात रहते हैं। सुरक्षा सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार पेट्रापोल के आसपास विशेष रूप से चार सबसे बड़े होल्डिंग सेंटर स्थापित किए गए हैं। इसके अलावा सीमा से सटे अन्य विभिन्न इलाकों में भी होल्डिंग स्टेशनों को तुरंत प्रभाव से चालू कर दिया गया है।
वापसी के लिए सीधा निर्देश: प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियों ने सीमा क्षेत्र में यह साफ संदेश प्रसारित किया है कि जो लोग अवैध रूप से भारत आए हैं और वापस जाना चाहते हैं, वे अधिकारियों से मिल सकते हैं। वे बिना किसी डर के स्थानीय प्रशासन, नजदीकी पुलिस स्टेशन या सीधे बॉर्डर सिक्योरिटी फोर्स से संपर्क स्थापित कर सकते हैं। इसके साथ ही देश के भीतर अवैध घुसपैठ कराने वाले दलालों के पूरे सिंडिकेट को ध्वस्त करने के लिए एक बहु-एजेंसी अभियान भी शुरू किया जा चुका है।
दलालों के नेटवर्क का भंडाफोड़: पकड़े गए नेटवर्क से यह खुलासा हुआ है कि ये दलाल प्रति व्यक्ति बीस से पच्चीस हजार रुपये या उससे ज्यादा रकम वसूलते थे। इस रकम के बदले वे बांग्लादेशी नागरिकों को फर्जी भारतीय पहचान पत्र, राशन कार्ड, बिजली बिल और रहने के ठिकाने मुहैया कराते थे। इस अवैध धंधे के तार सीधे बांग्लादेश में बैठे उनके सह-आरोपियों से जुड़े हुए थे जो वहां से नेटवर्क संचालित करते थे। अब सरकार ने ऐसे फर्जी दस्तावेज बनाने वालों और अवैध शरण देने वालों के खिलाफ कानूनी शिकंजा कस दिया है।
नदी और दलदली क्षेत्रों पर नजर: सीमा के जिन हिस्सों में भौगोलिक कारणों से अभी तक फेंसिंग नहीं हो पाई है, वहां पर अतिरिक्त सतर्कता बरती जा रही है। इन नदी-नालों, तेज बहाव वाले जलमार्गों, दलदली जमीनों और पोरस बॉर्डर वाले संवेदनशील इलाकों में जवानों की गश्त बढ़ा दी गई है। राज्य सरकार द्वारा फेंसिंग के लिए जमीन मुहैया कराए जाने के बाद सिलीगुड़ी कॉरिडोर में कटीले तार लगाने का काम तेज हो गया है। इसके साथ ही सीमा पार से होने वाले किसी भी संभावित जनसांख्यिकीय बदलाव को रोकने के प्रयास किए जा रहे हैं।
वीजा आवेदनों में आई कमी: पांच अगस्त दो हजार चौबीस से पहले जहां भारतीय दूतावासों में रोज पांच से छह हजार वीजा आवेदन आते थे, वहीं अब यह संख्या घटकर सिर्फ दो हजार रह गई है। इसका मुख्य कारण यह है कि सामान्य पर्यटन के लिए दिए जाने वाले टूरिस्ट वीजा को फिलहाल पूरी तरह से बंद कर दिया गया है। इस समय केवल व्यापार, चिकित्सा, सम्मेलन, रोजगार, मल्टीपल एंट्री और जीवनसाथी श्रेणी के वीजा ही प्राथमिकता पर दिए जा रहे हैं। वैध प्रवेश की पहचान के लिए दूतावासों में बायोमेट्रिक डेटा मिलान की प्रक्रिया बेहद सख्त कर दी गई है।





































