परम एकादशी का धार्मिक महत्व और तिथि हिंदू धर्म में भगवान विष्णु को समर्पित एकादशी व्रत का विशेष महत्व है। जो भी श्रद्धालु इस व्रत को नियमानुसार रखता है, उसे श्री हरि की विशेष कृपा प्राप्त होती है और वह सभी पापों से मुक्त हो जाता है। इस वर्ष 11 जून 2026, गुरुवार को परम एकादशी व्रत रखा जाएगा। चूंकि इस साल अधिकमास ज्येष्ठ महीने में लगा है, इसलिए इसे ज्येष्ठ अधिक एकादशी या परमा एकादशी कहा जाएगा। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दुर्लभ एकादशी का व्रत रखने से व्यक्ति को स्वर्ण दान और अश्वमेध यज्ञ के समान पुण्य फल मिलता है और अंततः मोक्ष की प्राप्ति होती है।
11 जून 2026: शुभ मुहूर्त और योग इस पवित्र दिन पूजा-पाठ के लिए कई अत्यंत शुभ मुहूर्त बन रहे हैं। सुबह का उत्तम मुहूर्त 05:23 AM से 07:07 AM तक रहेगा। दोपहर के समय जो लोग पूजा करना चाहते हैं, उनके लिए अभिजीत मुहूर्त 11:53 AM से 12:49 PM तक और लाभ-उन्नति मुहूर्त 12:21 PM से 02:05 PM तक रहेगा। इसके साथ ही, इस एकादशी के दिन ‘सर्वार्थ सिद्धि योग’ पूरे दिन रहेगा, जो इस व्रत के महत्व और इससे मिलने वाले फलों को कई गुना बढ़ा देता है।
भगवान विष्णु की संपूर्ण पूजा विधि 11 जून को व्रती सुबह जल्दी उठकर स्नानादि से निवृत्त हों और पीले रंग के वस्त्र धारण करें। घर के मंदिर में भगवान विष्णु की प्रतिमा के समक्ष घी का दीपक जलाएं और हाथ में थोड़ा सा जल व अक्षत लेकर व्रत का संकल्प लें। भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की प्रतिमा को गंगाजल से स्नान कराएं या उन पर जल छिड़कें। इसके पश्चात भगवान को पीले फूल, माला, फल, भोग और तुलसी दल अर्पित करें। ध्यान मुद्रा में बैठकर ‘ॐ नमो भगवते वासुदेवाय’ मंत्र का 108 बार जाप करें, आरती करें और पूजा में हुई भूलचूक की क्षमा मांगें।
परमा एकादशी की पौराणिक व्रत कथा प्राचीन काल में काम्पिल्य नगर में सुमेधा नामक एक ब्राह्मण और उसकी सती-साध्वी पत्नी पवित्रा रहते थे। दोनों घोर निर्धनता में जीवन बिताते हुए भी अत्यंत धार्मिक थे। गरीबी से तंग आकर एक दिन ब्राह्मण ने परदेश जाने का विचार किया, लेकिन पत्नी ने समझाया कि धन और संतान पूर्वजन्म के दान से मिलते हैं। एक दिन महर्षि कौडिन्य उनके घर पधारे। ब्राह्मण दंपति ने उनकी तन-मन से सेवा की। प्रसन्न होकर महर्षि ने उन्हें दरिद्रता से मुक्ति के लिए परमा एकादशी का व्रत और रात्रि जागरण करने का उपाय बताया। इस व्रत के प्रभाव से उनके समस्त दुख-दर्द दूर हो गए।
व्रत के सख्त नियम और पारण का समय एकादशी व्रत के नियम बहुत कड़े होते हैं, जिसमें अन्न का सेवन पूरी तरह वर्जित होता है। व्रती दिन भर फलाहार पर रहकर रात्रि भर जागरण करते हैं और भगवान का भजन-कीर्तन करते हैं। अगले दिन द्वादशी तिथि पर व्रत का पारण किया जाता है। परम एकादशी व्रत खोलने का समय 12 जून 2026 को सुबह 05:23 से सुबह 08:10 के बीच है। इस तय समय के दौरान व्रती को चाहिए कि वह किसी जरूरतमंद को दान-दक्षिणा दे और उसके बाद सात्विक भोजन ग्रहण करके अपना व्रत पूर्ण करे।
सुख-समृद्धि और खोए ऐश्वर्य की प्राप्ति परमा एकादशी का व्रत व्यक्ति के जीवन से दरिद्रता का समूल नाश करने वाला माना गया है। शास्त्रों में वर्णित है कि इसी व्रत के प्रताप से धन के देवता कुबेर जी और सत्यवादी राजा हरिश्चंद्र ने भी अपने खोए हुए ऐश्वर्य और राजपाट की दोबारा प्राप्ति की थी। जो भी श्रद्धालु इस दिन सच्चे मन से विष्णु जी की आराधना करता है, उसके सारे मनोरथ पूर्ण होते हैं और जीवन में सुख, शांति और अपार समृद्धि का वास होता है।





































