अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) ने ईरान पर और हमले करने की अपनी पिछली सैन्य धमकी को वापस ले लिया है। इससे पहले उन्होंने खुले तौर पर चेतावनी दी थी कि आज रात ईरान पर बहुत ज़ोरदार हमला हो सकता है। ट्रंप ने गुरुवार को स्पष्ट किया कि उन्होंने शाम को ईरान पर होने वाले तय हमले और बमबारी के आदेश को रद्द कर दिया है। यह फैसला ऐसे संवेदनशील समय में आया है जब दोनों देशों के बीच सैन्य तनाव अपने बिल्कुल चरम पर पहुंच चुका था। वाशिंगटन के इस महत्वपूर्ण कदम से तत्काल युद्ध भड़कने की वैश्विक आशंका काफी हद तक कम हो गई है।
नेताओं का महत्वपूर्ण कूटनीतिक दखल: डोनाल्ड ट्रंप के इस अचानक लिए गए फैसले के पीछे तीन प्रमुख देशों के शीर्ष नेताओं की बहुत महत्वपूर्ण भूमिका रही है। कतर (Qatar), संयुक्त अरब अमीरात (UAE) और पाकिस्तान (Pakistan) के उच्च नेताओं ने संकट को टालने के लिए ट्रंप से सीधे फोन पर बात की। इन सभी नेताओं ने अमेरिकी राष्ट्रपति से यह विशेष आग्रह किया कि वे ईरान के खिलाफ तुरंत कोई आक्रामक सैन्य कदम न उठाएं। इस कूटनीतिक हस्तक्षेप ने पूरे क्षेत्र में बढ़ते तनाव को कम करने में एक बहुत बड़े उत्प्रेरक का काम किया है। इन वैश्विक नेताओं के इस त्वरित प्रयास ने मध्य पूर्व में एक बड़े और विनाशकारी युद्ध को सफलतापूर्वक टाल दिया है।
समझौते की उम्मीद ने रोका युद्ध: एक वरिष्ठ अमेरिकी प्रशासनिक अधिकारी ने इस पूरे घटनाक्रम के पीछे के असली कारणों का अब विस्तार से खुलासा किया है। अधिकारी के मुताबिक विदेशी नेताओं के साथ हुई बातचीत से ट्रंप को यह समझाने में काफी मदद मिली कि स्थिति नियंत्रण में आ सकती है। नेताओं ने ट्रंप को विश्वास दिलाया कि ईरान के साथ एक शुरुआती और शांतिपूर्ण समझौता बस होने ही वाला है। इसी संभावित समझौते की उम्मीद के कारण डोनाल्ड ट्रंप अपने पहले के अत्यधिक कड़े सैन्य रुख से पूरी तरह नरम पड़े। शांति की इस स्पष्ट संभावना को देखते हुए उन्होंने हमले की योजना से पूरी तरह पीछे हटने का यह बड़ा निर्णय लिया।
इन प्रमुख नेताओं ने की बात: इस महत्वपूर्ण कूटनीतिक पहल में सक्रिय रूप से शामिल सभी नेताओं के नाम अब आधिकारिक तौर पर सबके सामने आ गए हैं। मीडिया की खबरों के अनुसार वाशिंगटन फोन कॉल करने वाले इन नेताओं में कतर के अमीर तमीम बिन हमद अल थानी प्रमुख रूप से शामिल थे। उनके साथ ही संयुक्त अरब अमीरात के राष्ट्रपति मोहम्मद बिन ज़ायद अल नाहयान ने भी अमेरिकी राष्ट्रपति से विस्तृत बात की। इसके अतिरिक्त कूटनीतिक मोर्चे पर पाकिस्तान के सेना प्रमुख आसिम मुनीर ने भी इस महत्वपूर्ण बातचीत में अपना अहम योगदान दिया। इन तीनों प्रभावशाली नेताओं के इस संयुक्त प्रयास ने वाशिंगटन के युद्ध संबंधी अंतिम फैसले को बहुत गहराई से प्रभावित किया।
युद्ध खत्म होने की जताई गई संभावना: अपनी आक्रामक सैन्य योजना को आधिकारिक रूप से रद्द करने के बाद डोनाल्ड ट्रंप ने भविष्य के लिए कई सकारात्मक संकेत दिए हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति ने दावा किया है कि आने वाले दिनों में युद्ध को हमेशा के लिए खत्म करने के संबंध में कोई महत्वपूर्ण समझौता जरूर हो सकता है। यह बयान इस बात का पुख्ता संकेत है कि दोनों देशों के बीच सैन्य तनावपूर्ण माहौल के बावजूद अब भी बातचीत के कई रास्ते खुले हैं। ट्रंप का यह नरम रुख वैश्विक कूटनीति और बाजार की स्थिरता के लिए एक बहुत ही बड़ी राहत भरी खबर बनकर आया है। इस नए घटनाक्रम के बाद अब वाशिंगटन और तेहरान के बीच एक संभावित शांति समझौते की उम्मीदें काफी अधिक बढ़ गई हैं।
ईरानी नेतृत्व से बातचीत का दावा: डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के साथ चल रही पर्दे के पीछे की कूटनीति को लेकर दुनिया के सामने एक बहुत ही बड़ा दावा किया है। उन्होंने बताया कि शांति समझौते को लेकर ईरान के साथ जो भी बातचीत चल रही थी वह ईरानी नेतृत्व के उच्चतम स्तर तक पहुंच गई थी। ट्रंप ने यह भी दावा किया कि इस चल रही बातचीत और समझौते के मसौदे को ईरान के शीर्ष स्तर से आवश्यक मंजूरी भी मिल गई थी। इसी उच्च स्तरीय कूटनीतिक सहमति के आधार पर ही अमेरिका ने अंतिम समय में अपने सैन्य कदम वापस पीछे खींचे हैं। माना जा रहा है कि यह नया कूटनीतिक संवाद पूरे खाड़ी क्षेत्र में दीर्घकालिक शांति की एक मजबूत नींव रख सकता है।





































