पाकिस्तान में गुरुद्वारे के सेवादार सिख दंपति की हत्या के बाद भारत में भारी गुस्सा देखा जा रहा है। इस दर्दनाक घटना की खबर मिलते ही कई भारतीय नेताओं ने अपनी कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। भारतीय नेताओं ने पाकिस्तान के प्रशासन से आरोपियों के खिलाफ तुरंत और सख्त कार्रवाई करने का आग्रह किया था। भारत के कई प्रमुख राजनीतिक और धार्मिक चेहरों ने इस अमानवीय कृत्य की घोर निंदा की है। उनका साफ कहना है कि धार्मिक स्थलों के भीतर इस तरह की हिंसा किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं की जा सकती।
अंतरराष्ट्रीय हस्तक्षेप की जोरदार मांग इस नृशंस हत्याकांड को लेकर भारत के कई वरिष्ठ नेताओं ने वैश्विक समुदाय का ध्यान भी खींचा है। भारतीय जनता पार्टी के प्रमुख नेता चरुण चुघ ने इस घटना पर गहरी चिंता व्यक्त की है। अकाल तख्त के जत्थेदार ज्ञानी कुलदीप सिंह गड़गज ने भी इस दोहरे हत्याकांड को लेकर सख्त रुख अपनाया है। बीजेपी नेता चरुण चुघ और अकाल तख्त के जत्थेदार ने इस मामले में अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं से हस्तक्षेप करने की मांग की है। इन नेताओं का मानना है कि अंतरराष्ट्रीय दबाव के बिना ऐसे मामलों में उचित न्याय मिलना काफी मुश्किल होता है।
पाकिस्तानी नेतृत्व से सीधी अपील सिख समुदाय के नेताओं ने इस मामले को लेकर सीधे पाकिस्तानी सरकार के शीर्ष नेतृत्व से संपर्क साधा है। अकाल तख्त के जत्थेदार गड़गज ने पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ से इस घटना का संज्ञान लेने का आग्रह किया। इसके साथ ही उन्होंने खैबर पख्तूनख्वा के मुख्यमंत्री मोहम्मद सोहेल खान अफरीदी से भी कड़ा संज्ञान लेने की अपील की है। जत्थेदार ने इन दोनों शीर्ष नेताओं से मांग की है कि दोषियों को तत्काल गिरफ्तार किया जाए। उन्होंने यह भी सुनिश्चित करने को कहा कि पकड़े गए दोषियों को कानून के तहत कठोर से कठोर सजा दिलाई जाए।
अल्पसंख्यक अधिकारों पर सरकार की आलोचना सिख दंपति की इस तरह हुई निर्मम हत्या ने पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों की सुरक्षा पर फिर से गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। भारतीय नेताओं ने वहां के हालात को लेकर पाकिस्तान सरकार की नीतियों पर कड़ा प्रहार किया है। दोनों प्रमुख नेताओं ने अल्पसंख्यकों और उनके मानवाधिकारों की रक्षा करने में नाकाम रहने को लेकर पाकिस्तान सरकार की कड़ी आलोचना की। उनका कहना है कि पाकिस्तान में रहने वाले अल्पसंख्यक समुदाय लगातार डर और असुरक्षा के साये में जीने को मजबूर हैं। यह घटना इस बात का प्रत्यक्ष प्रमाण है कि वहां धार्मिक अल्पसंख्यकों की जान-माल पूरी तरह से खतरे में है।
संयुक्त जांच दल का गठन इस अंतरराष्ट्रीय दबाव और मामले की संवेदनशीलता के बीच पाकिस्तानी प्रशासन ने जांच तेज कर दी है। मामले की तह तक जाने के लिए एक उच्च स्तरीय जॉइंट इन्वेस्टिगेशन टीम बनाई गई है। इस टीम में स्थानीय पुलिस अधिकारियों के साथ-साथ काउंटर-टेररिज्म डिपार्टमेंट के लोगों को भी शामिल किया गया है। इसके अलावा कई दूसरे सीनियर अधिकारी भी इस जांच टीम का महत्वपूर्ण हिस्सा बनाए गए हैं। यह संयुक्त टीम गिरफ्तार किए गए मुख्य संदिग्ध शेर शाह के पुराने रिकॉर्ड और संपर्कों की गहन जांच कर रही है।
जांच में सामने आए शुरुआती तथ्य इस संयुक्त टीम की शुरुआती जांच में अभी तक कई महत्वपूर्ण बिंदु उभर कर सामने आए हैं। पुलिस अधिकारी मसूद अहमद बंगश के अनुसार संदिग्ध का किसी बैन किए गए संगठन से जुड़ाव नहीं मिला है। जांचकर्ताओं ने स्पष्ट किया है कि आरोपी के किसी आतंकवादी संगठन या ऑर्गनाइज्ड नेटवर्क से जुड़े होने का कोई सबूत नहीं है। अधिकारियों ने कहा है कि वे संदिग्ध के बयानों के आधार पर सभी मुमकिन एंगल से जांच कर रहे हैं। वे अब तक इकट्ठा किए गए दूसरे सबूतों को भी बारीकी से देख रहे हैं ताकि हत्या का असली मकसद सामने आ सके।


























































